World Earth Day
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विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day) प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल को मनाया जाता है। यह दिन वैश्विक संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) द्वारा प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के महत्व को जागरूक करने के लिए समर्पित है। इस दिन कई देशों में विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जैसे कि पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूकता प्रदान करना, पेड़ लगाना, सफाई अभियान, और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना।

पृथ्वी दिवस क्यों मनाया जाता है World Earth Day

पृथ्वी दिवस का मनाया जाना प्रकृति और पर्यावरण की महत्वपूर्णता को जागरूक करने के लिए है। यह एक संदेश है कि हम सभी को पृथ्वी की संरक्षण की जिम्मेदारी को ध्यान में रखनी चाहिए ताकि हम इसे भविष्य के लिए सुरक्षित और स्वस्थ बना सकें।
पृथ्वी दिवस के दौरान, लोग पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर ध्यान देते हैं। इस दिन कई जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण अभियान, सफाई अभियान, आर्थिक विकास के प्रोजेक्ट्स, और वायुमंडलीय अध्ययन के लिए आयोजन किये जाते हैं। इस दिन का महत्व बढ़ाने का उद्देश्य पृथ्वी के पर्यावरणीय संतुलन और स्वस्थता के प्रति लोगों को जागरूक करना है, ताकि समुदाय के सदस्य अपने कार्यों में पर्यावरण की संरक्षा को सर्वोपरि मानें।

पृथ्वी दिवस का जनक किसे कहा जाता है World Earth Day

पृथ्वी दिवस का जनक गेयर्लॉर्ड नेल्सन (Gaylord Nelson) कहलाते हैं। उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के संसदीय सदस्य और वित्त मंत्री के रूप में सेवाएँ देने के लिए जाना जाता है। उन्होंने 1969 में पृथ्वी दिवस का आयोजन किया था, जिसका उद्देश्य था लोगों को पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूक करना और संरक्षण की ओर ध्यान आकर्षित करना। 22 अप्रैल, 1970 को, लाखों लोगों ने संगठित तरीके से भारत-अमेरिका में लोगों ने इस आंदोलन का समर्थन किया। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप 1970 में पृथ्वी दिवस का प्रथम आयोजन किया गया।

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का सिद्धांत किसके द्वारा प्रस्तावित किया गया World Earth Day

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के सिद्धांत कई वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित किए गए हैं, और इसके बारे में कई थियरीज़ हैं। एक प्रमुख सिद्धांत है “अभिजीवनवाद” (अभिजीवनवाद), जिसे लेविन और ऑपरनिन ने 1920 के दशक में प्रस्तावित किया था। यह सिद्धांत कहता है कि पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति धार्मिक और आध्यात्मिक शक्तियों द्वारा हुई है। इसके अतिरिक्त, विशेष रूप से जीवाश्मकीय अद्भुतियों के आधार पर, स्टैनले मिलर और हरोल्ड यूरी के अनुसार, पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के लिए शुरुआत में धार्मिक या आध्यात्मिक शक्तियों की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि यह अबिओजनिक रूप से हो सकती है, जिसमें जीवन बिना जीवाश्मकीय उत्पत्ति के उत्पन्न हो सकता है। जीवन की उत्पत्ति के इन सिद्धांतों के अलावा, अब तक विभिन्न वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोगों द्वारा यह प्रश्न अभी भी विवादित है और जारी है।

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Anjana Kashyap

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