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What is religion: गीता, जिसे “भगवद् गीता” के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक है। यह महाभारत के भीष्म पर्व में रचित है और इसमें भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद को दर्शाया गया है। गीता में धर्म की अनेक नजरियां, आदर्श, और सिद्धांतों का विस्तृत वर्णन किया गया है। धर्म की परिभाषा गीता में विभिन्न तत्त्वों और अवधारणाओं के माध्यम से प्रस्तुत की गई है, जिसे मैं निम्नलिखित रूप में 2000 शब्दों में वर्णित करने का प्रयास करता हूँ:

गीता में धर्म का अर्थ बहुत व्यापक और गहरा है। धर्म शब्द सिर्फ धार्मिक रीति-रिवाजों और पूजा-पाठ को ही सीमित नहीं करता, बल्कि यह जीवन की प्रत्येक क्षेत्र में व्यक्ति के आचरण और नैतिकता के साथ संबंधित है। गीता में धर्म का अर्थ अनुशासन, कर्तव्य, नैतिकता, समर्पण, और जीवन के विभिन्न पहलुओं में समाहित किया गया है।

प्रारंभ में, गीता में धर्म का विस्तार किया गया है जिसमें यह उदाहरण दिया गया है कि धर्म का अर्थ है कर्तव्य का पालन करना और कर्मों को निष्काम भाव से करना। गीता में कहा गया है कि हमें अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए और फल की चिंता नहीं करनी चाहिए। यहाँ तक कि जीवन के हर क्षेत्र में कर्तव्यों का पालन करने से ही सच्चा धर्म प्राप्त होता है।

गीता में धर्म की अन्य एक महत्वपूर्ण अवधारणा है आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता की। यहाँ उस आत्मा की उत्कृष्टता का उल्लेख है, जो कि जीवन के रहस्यों का संज्ञान करने के लिए आत्मा को स्वतंत्र और स्वाधीन बनाता है। यह धार्मिक विचारधारा हमें उन्नत आत्मविश्वास और सामर्थ्य का अनुभव कराती है, जो हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते समय सहायक साबित होती है।

धर्म के अलावा, गीता में जीवन के सार्वभौमिक तत्त्वों का भी वर्णन किया गया है, जैसे कर्म, भक्ति, ज्ञान, और वैराग्य। यह अद्वितीय विचारधाराओं का संगम है जो हमें एक उत्तम और समृद्ध जीवन के मार्ग की दिशा में मार्गदर्शन करते हैं। गीता के अनुसार, जीवन का अध्ययन, साधना, और समर्पण ही सच्चा धर्म है। यहाँ धर्म का अर्थ सिर्फ धार्मिक परंपराओं के अनुसार आचरण करने से नहीं है, बल्कि यह आत्म-विकास और समग्र विकास का एक समृद्ध और व्यापक प्रक्रिया है।

गीता के माध्यम से धर्म की गहराई, व्यापकता, और महत्व को समझने का प्रयास करते समय, हम देखते हैं कि धर्म केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह जीवन का एक अभिन्न और अपरिहार्य हिस्सा है। यह हमें नैतिक और आध्यात्मिक विकास का मार्गदर्शन करता है और हमें एक उच्च और समृद्ध जीवन की दिशा में मार्गदर्शन करता है। इस प्रकार, गीता में धर्म का अद्वितीय और व्यापक अर्थ है, जो हमें एक संतुलित, संवेदनशील, और समृद्ध जीवन के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

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Anjana Kashyap

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