Solution to economic problems according to Pandit Pradeep Mishra
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Note: श्री शनि वंदना का 9 बार जाप करना जरूरी है, यह वंदन 9 बार जरूर पढ़ें:-

श्री शनि वंदना का पूरा पाठ निम्नलिखित है:

श्री शनिदेव वंदना

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंडसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंडसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

यानी सुर्यमंडले विशेषे तमःस्थितम्।
रोहिणी तु ग्रहस्तं सर्वदा स्मराम्यहम्॥

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

नीलांजन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंडसंभूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

इस वंदना में भगवान शनि की प्रशंसा की जाती है और उनकी कृपा के लिए प्रार्थना की जाती है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए इस वंदना का नियमित जप किया जाता है।

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Anjana Kashyap

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