shree Ganesh Arti
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shree Ganesh Arti श्री गणेश की महिमा और गुणों की महत्वपूर्ण भक्ति रचना है, काफी लोकप्रिय है

Note: श्री गणेश वंदना आठ बार जरूर पढ़ें-

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

एकदंत दयावन्त चारभुजाधारी।
माथे पे जो तिलक है, मुसकानों की झालरी॥

अगजानन पद्मार्कम गजाननं अहर्निशम्।
अनेकदंतं भक्तानां एकदंतं उपास्महे॥

मोदक प्रिय वक्रतुण्ड श्रीकरं विघ्ननाशकं।
लंबोदरं भालचंद्रं सुरेशं लंकारेशम्॥

रिद्धि-सिद्धि की सिद्धि के दाता वक्रतुण्ड महाकाया।
कोटीसूर्य समप्रभा, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येशु सर्वदा॥

एक दंत दयावन्त, चार भुजाधारी।
माथे पे जो तिलक है, मुसकानों की झालरी॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

सुमिरौं पवनकुमार बलबुधि विद्या देहु मोहि।
हरहु कलेस बिकार को जय जय हनुमत बलबुद्धि विद्या देहु मोहि॥

गणपति करुनाकर गुनसंपदकरकूप।
जलसँ धर गुनी सेवक दाता भगवन्त॥

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

आरती कीजै जय गणेश देवा।
सुक्ष्मरूप धरि सियहिं दिखावा॥

लक्ष्मी का माता हे निरंतर सुरवर नैना।
ये चालीसा पढ़े हर कोई, सुख संपत्ति आना॥

मंगलमूर्ति मोरया।।

यह चालीसा गणेश जी की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए पढ़ी जाती है। इसे नियमित रूप से पढ़कर आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि, और शुभकामनाओं को आकर्षित कर सकते हैं।

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Anjana Kashyap

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