How to Meditiation
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shiv chalisa in hindi: शिव चालीसा को पढ़ने के नियम भी कई धार्मिक संस्थाओं, परंपराओं और व्यक्तिगत आधार पर विभिन्न हो सकते हैं। यहां कुछ सामान्य नियम और मान्यताएं हैं जो लोगों द्वारा मान्य होती हैं:

दैनिक पाठ (Daily Recitation): बहुत से शिव भक्त हर दिन शिव चालीसा का पाठ करते हैं। इसका उद्देश्य शिव की पूजा और आध्यात्मिक साधना में स्थिरता लाना होता है।
विशेष अवसरों पर पाठ (Recitation on Special Occasions): शिव चालीसा का पाठ विशेष अवसरों पर भी किया जाता है, जैसे कि महाशिवरात्रि, श्रावण मास, पूर्णिमा, सोमवार, शिवरात्रि आदि।
अनुष्ठानिक पाठ (Ritualistic Recitation): कुछ धार्मिक सम्प्रदायों में, शिव चालीसा को नियमित रूप से अनुष्ठान के भाग के रूप में पढ़ा जाता है, जो आध्यात्मिक उन्नति के लिए किया जाता है।
संघर्ष या संकट में पाठ (Recitation in Times of Struggle or Distress): कई लोग संकट या संघर्ष के समय में शिव चालीसा का पाठ करते हैं। उन्हें माना जाता है कि शिव चालीसा की शक्ति संकटों को दूर करने में मदद कर सकती है।
पाठ की संख्या (Number of Recitations): कुछ लोग शिव चालीसा का निश्चित संख्या में पाठ करने का प्रयास करते हैं, जैसे कि एक, तीन, पाँच, या अधिक बार।
अन्य विधियाँ (Other Practices): कुछ धार्मिक सम्प्रदायों में, शिव चालीसा के पाठ के साथ-साथ अन्य विधियाँ भी मान्य होती हैं, जैसे कि आरती, पूजा, ध्यान, चालीसा के मंत्रों का जाप आदि।
इस तरह, शिव चालीसा का पाठ किसी निश्चित नियमितता में किया जा सकता है या किसी विशेष अवसर पर किया जा सकता है। यह व्यक्तिगत आधार पर भी निर्भर करता है कि एक व्यक्ति कितना समय और साधना इसे देने को तैयार है।

 

धार्मिक प्रथाओं का पालन करना व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास और आत्म-संयम के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन किसी नियम का अनुपालन करने पर ऐसा होना कि क्षुधा को मिले, शिव चालीसा के नियमों का अनुपालन करने पर यह योग्य नहीं हो सकता है।

अगर किसी व्यक्ति ने शिव चालीसा के नियमों का पालन नहीं किया है, तो उनके लिए कुछ दुखद परिणाम हो सकते हैं, जैसे कि:

आत्मिक अशांति: धार्मिक नियमों का पालन न करने से आत्मिक अशांति की स्थिति हो सकती है। यह व्यक्ति को आत्म-संयम और आत्म-विकास की अवश्यकता को महसूस करा सकता है।
धार्मिक विकल्पों की अवश्यकता: धार्मिक नियमों का अनुपालन न करने पर व्यक्ति को अन्य धार्मिक विकल्पों की ओर मोड़ लेने की आवश्यकता हो सकती है।
आध्यात्मिक प्रगति में बाधा: शिव चालीसा के नियमों का पालन न करने से व्यक्ति की आध्यात्मिक प्रगति में बाधा हो सकती है। ध्यान, तपस्या और भक्ति के लिए समय निकालने की अभाव में, उन्हें आत्म-संयम और स्वाध्याय की कमी महसूस हो सकती है।
कर्मिक फल: धार्मिक नियमों का अनुपालन न करने से कर्मिक फल का सामना किया जा सकता है। किसी भी धार्मिक कार्य का अनुपालन करने पर उससे प्राप्त किए गए कर्मिक फल का अनुभव नहीं करने पर, व्यक्ति को कुछ दुःख हो सकते हैं।
इन सभी कारणों से, शिव चालीसा के नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण हो सकता है। यह व्यक्ति को आध्यात्मिक विकास में सहायता कर सकता है और उन्हें आत्मिक शांति और सुख की प्राप्ति में मदद कर सकता है।

shiv chalisa in hindi

श्री गणेशाय नमः।
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अब्बय वारी रंगरवारी॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला, सदा करत संतन प्रतिपाला।
भाल चंद्रमा सोहत नीके, कानन कुंडल नाग फानी के॥

अङ्ग गौर शिर गांग बहाये, मुण्ड माल तन चर्चा लाये।
वासना जीवनम्, धरत नर नारी, भूप भूपाल भाल बारी॥

अज्ञान जंजल मरि बुद्धि हरी, दरसन करत जन अति सुखरी।
जो यह पाठ करे मन लाई, चूँ चूँ शंकर अर्पण कराई॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावै, जियंत करत सकल मंगल पावै।
जो नर चाहे शुभ कामना, कहें चालीसा सोइ जन जाना॥

शंकर हो प्रसन्न तुम्हारे, चालीसा कहत हैं भव्य भारे।
है अस्त सिद्धिसाखी गौरीसा, पारवतीसुत महादेव की दासा॥

जो कोई नर गावै महिमा, शंकर के चरणों में धरै।
ताहि भल मानहु प्रभु मिलत, नर चाहिए शुभ कारज साधै॥

श्री शिव चालीसा की जो कोई, पाठ करै चालीस बार।
श्रीकृष्ण चरित मनस मांगही, पावै सो पार्थ नारायण अस धार॥

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला, सदा करत संतन प्रतिपाला।
जो कोई नर ध्यावहिं मुक्ति, जे धारहिं अस बारन लैलास॥

दोहा
पवन तनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

जय शिव ओंकारा, हर शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥

लिंग राज ध्यानी सुजानी, भये शक्ति गढ़ि चाली।
नंदी गनेशा सोई, या तुलसीदास भाली॥

शिवजी के द्वार पर जो कोई, आवै भक्ति संगा।
कहे शिव कवन पूजा, करत सबका संगा॥

पार्वती पति संग रच्छा करै।
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हंस हंस हंसें जीवन फल पावै॥

शिव लिंग सदा शिव ध्यान जो करै।
कहे तुलसी सादर शिव भजन बिन ज्ञान बृंद भव अंधकार॥

आदि अनंत अंत महाकाल दस अवतार।
जो कलि के सकल पालनहार॥

काल कराल महाकाल काल विकाल।
धरती पूत आपुलोक धारा॥

बागीस्वरी भुवने निखिल भुवन धारा।
गान्धारव विद्यावि गोपिगन जनारा॥

हरन्त त्राहित अपार भवभावार।
हरत कष्ट अवस्था सकल जन उधारा॥

अद्भुत रूप अनुपम नमनीय अनंता।
सोहित अंत महिमा अविनाशि अन्त यानी॥

जय जय जय अनंत अनंत हेतु।
शिव सकल सुख विधाता प्राणिपति सुखदाता॥

कृपानिधि कृपा करि अनुपम भावहिं।
देव दयालु दया करहिं संसार सुख भावहिं॥

सोहत सुखदाता अनंत सरूपा।
त्रिगुण स्वामी सुख पावहिं बुद्धि रूपा॥

नित नित नव भाव बिबिध सेवा।
भजत सुखदाता ब्रह्मदेव सनेवा॥

नमस्तासु सदा सनातन रूपा।
आदिनिधान आदि गुण गुणगाना॥

भजत हो सदा श्रीशंकर रूपा।
सुमिरत सुखदाता भव ताप हरण हैयाना॥

नित नित जपत हर हर सनेवा।
पावहि सुख सदा नरनर सेवा॥

या सो शिव चालीसा पाठ करावे।
ताहि सकल सुख पावहि संसार नारी नरेंद्र सेवा॥

नित्य नियमित चालीसा होय।
तुलसीदास प्रभु पथ पुराना॥

नित्य नियमित चालीसा के कारण।
पावहिं सुख अघ के भाग कौन॥

नित्य नियमित चालीसा के पाठ सुन।
ताहि सुख सम्पदा बहुत सुन॥

पाठ कीजै बहुत कीन्ह प्रसन्न होइ।
ताहि नंदि गणेश आवै शोभा॥

शंकर पट कपाट खुलावै।
संकट नाश सुख उपजावै॥

जो यह पड़हिं शिव चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥

शंकर जी की चालीसा, के सदा हितकारी।
पाठ करै जो कोई, धृव सिद्धि पावै संसार॥

दोहा
पवनतनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

श्री गणेशाय नमः।।

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Anjana Kashyap

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