Solution to economic problems according to Pandit Pradeep Mishra
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shani dev ki aarti: श्री शनिदेव भगवान हिंदू धर्म के नवग्रहों में से एक हैं। वे कर्मफल के नियंत्रण के देवता हैं और धर्म, न्याय और कर्म के प्रतीक हैं। शनि का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर महत्वपूर्ण होता है, और उन्हें श्रद्धा और समर्पण से पूजा जाता है।

शनिदेव की महिमा कई पुराणों, श्लोकों और ग्रंथों में वर्णित है। उनके विषय में अनेक कथाएं प्रसिद्ध हैं, जो उनकी शक्तियों और विशेषताओं को व्यक्त करती हैं। शनि के देवत्व का प्रमुख विशेषता उनकी न्यायप्रियता और कठिनाईयों को सहन करने की क्षमता है। वे धर्म और न्याय की पालना करते हैं, लेकिन अधर्मियों के प्रति नैतिकता से सख्त होते हैं। शनिदेव की पूजा से भक्तों को धर्म, संयम, और सफलता की प्राप्ति में सहायता मिलती है।

शनिदेव की महिमा को व्यक्त करने के लिए उन्हें श्रद्धापूर्वक पूजा और आराधना की जाती है, जिससे उनके भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त होती है। उनकी महिमा का गुणगान भक्तों द्वारा नित्य अनुसरण किया जाता है और उन्हें शनिदेव के आशीर्वाद का आनंद मिलता है।

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय हमारी।
सनकादिक ब्रह्मराज, मुनिसुरमुनि जनतारी॥

भूत प्रेत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै।
नासे रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु…

दीनानाथ श्रीशनिदेव, आतुर अनाथ अब निवारै।
कृपा दृष्टि चरण लगायी, शत्रुन की परवाह नहिं करै॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु…

दारिद्र रोग दुःख बीभत्स, अब निवारै करहु कृपा अति।
विनय करैं हम जोगी बाबा, श्रद्धा ध्यान लगाय अति॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु…

अपने सेवक का आनै, अधिकारी पहिमामहिं।
नहिं छोड़े अपना धाम, जन के तारन कारण किए॥

जय जय श्री शनिदेव प्रभु…

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Anjana Kashyap

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