hanuman chalisa lyrics in Hindi
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हनुमान चालीसा को पढ़ने के नियम और मान्यताएं कुछ विभिन्न संस्थाओं, परम्पराओं और धार्मिक सम्प्रदायों में अलग-अलग हो सकती हैं। यह कुछ लोगों के व्यक्तिगत आधार पर भी निर्धारित होते हैं। यहां कुछ सामान्य नियम और मान्यताएं हैं जो अधिकांश लोगों द्वारा मान्य होती हैं:

दैनिक पाठ (Daily Recitation): हानिक मंदिरों और हनुमान भक्तों की अधिकांश परंपराएं उपासना का एक अटूट हिस्सा मानती हैं कि हनुमान चालीसा का दैनिक पाठ करना चाहिए। यह दिनचर्या का एक महत्वपूर्ण अंग है और भक्ति में स्थिरता लाता है।
विशेष अवसरों पर पाठ (Recitation on Special Occasions): कई लोग साल में कुछ विशेष अवसरों पर हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, जैसे कि हनुमान जयंती, हनुमान जयंती, रामनवमी, शनिवार और मंगलवार को।
अनुष्ठानिक पाठ (Ritualistic Recitation): कुछ धार्मिक सम्प्रदायों में, हनुमान चालीसा को नियमित रूप से एकांत में पाठ करने के नियम निर्धारित किए जाते हैं, जो आध्यात्मिक उन्नति और शांति के लिए किए जाते हैं।
संघर्ष या संकट में पाठ (Recitation in Times of Struggle or Distress): कई लोग संकट या संघर्ष के समय में हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। उन्हें माना जाता है कि हनुमान चालीसा की शक्ति संकटों को दूर करने में मदद कर सकती है।
पाठ की संख्या (Number of Recitations): कुछ लोग हनुमान चालीसा का निश्चित संख्या में पाठ करने का प्रयास करते हैं, जैसे कि एक, तीन, पाँच, या अधिक बार।
अन्य विधियाँ (Other Practices): कुछ धार्मिक सम्प्रदायों में, हनुमान चालीसा के पाठ के साथ-साथ अन्य विधियाँ भी मान्य होती हैं, जैसे कि आरती, पूजा, ध्यान, चालीसा के मंत्रों का जाप आदि।
सम्पूर्णतः, हनुमान चालीसा का पाठ किसी निश्चित नियमितता में किया जा सकता है या किसी विशेष अवसर पर किया जा सकता है। यह व्यक्तिगत आधार पर भी निर्भर करता है कि एक व्यक्ति कितना समय और साधना इसे देने को तैयार है।

श्रीगुरु चरण सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवनकुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

रामदूत अतुलित बलधामा।
अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन वरण विराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

शंकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग वंदन॥

विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिवे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

भीम रूप धरि असुर संहारे।
रामचंद्र के काज सवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाए।
श्रीरघुवीर हरषि उर लाए॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो यश गावै।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावै॥

संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जय जय जय हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महं डेरा॥

दोहा
पवनतनय संकट हरण, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप॥

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Anjana Kashyap

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