Buddhist Story On karma or fate bigger
0 1 min 4 weeks
0 0
Spread the love
Read Time:28 Minute, 18 Second

Buddhist Story On karma or fate bigger: चाहे कितना भी प्रयास क्यों न कर ले कितना भी प्रयास क्यों न कर ले उसे अपने कर्मों का फल तो भोगना ही पड़ता है। चाहे मनुष्य कितना ही प्रयत्न कर ले लेकिन वह कभी अपने कर्मों से बच नहीं सकता। जैसी करनी वैसी भरनी यह वाक्य तो आपने सुना ही होगा। अर्थात जैसे आप कर्म करोगे वैसा ही आपको फल भी प्राप्त होगा। लेकिन मेरा एक प्रश्न है क्या आप इस बात पर यकीन करते हैं कि जैसा आप कम करेंगे वैसा ही आपको फल भी मिलेगा। अब आप में से अधिकतर लोगों के मन में यह प्रश्न जरूर उठ रहा होगा क्योंकि इसमें पूछने वाली बात क्या हैयह तो सत्य ही है कि जैसे हम कर्म करेंगे वैसा ही हमें फल भी मिलेगा। लेकिन एक बार के लिए आंखें बंद करके अपने आप से यह प्रश्न कीजिए देखिएगा कि आपको इस प्रश्न का उत्तर स्पष्ट से नहीं मिल पाएगा. कहीं ना कहीं आपके मन में एक संशय जरूर होगा कि क्या यह बात सच है या झूठ दोस्तों आज इस कहानी से हम समझेंगे कर्मों का खेल आखिर अच्छे कर्मों का फल अच्छा और बुरे कर्मों का फल बुरा कैसे होता है. बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में एक बहुत ही ज्ञानी पंडित रहता था एक दिन वह अपने बचपन के दोस्त से मिलने के लिए दूसरे गांव में जा रहा था उसका वह दोस्त बचपन से ही गुंगा और एक पैर से अपाहिज था उसे पंडित के गांव से उसके दोस्त का घर काफी दूर था वहां जाने के लिए बीच-बीच में कई सारे छोटे-छोटे गांव पढ़ते थे पंडित रास्ते में अपनी धुन में चला जा रहा था चलते-चलते उसकी मुलाकात एक व्यक्ति से होती है रास्ते में उसे एक आदमी मिलता है जो ऐसा लगता था कि वह किसी का इंतजार कर रहा था और वह भी पंडित के साथ चलने लगता है उसे आदमी को देखकर पंडित बहुत खुश हो जाता है उसने सोचा चलो अच्छा हुआ साथ-साथ चलने से उसका सफर आसानी से कट जाएगा बात की शुरूआत करने के लिए उसे पंडित ने उसे व्यक्ति से उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम धर्मराज बताया। पंडित को यह नाम कुछ अजीब सा लगता है लेकिन उसने नाम के विषय में कुछ और पूछना उचित नहीं समझ दोनों धीरे-धीरे साथ में चल रहे थे तभी रास्ते में एक गांव आता है गांव का प्रवेश द्वार आते ही धर्मराज ने पंडित से कहा तुम आगे चलो मुझे इस गांव में एक काम है मैं तुमसे आगे मिलता हूं। पंडित ने कहा ठीक है वह आगे रास्ते में चल देता है कुछ देर बाद उसे गांव में खबर फैली की एक व्यक्ति को सांड ने अपने सिंह में फंसा कर मार दिया है। जैसे ही सांड ने उसे व्यक्ति को मारा ठीक कुछ ही देर में धर्मराज पंडित के पास आ गया और फिर दोनों चलना शुरू कर देते हैं और चलते-चलते एक दूसरे गांव के द्वार पर पहुंच जाते हैं उसे गांव के बाहर एक बड़ा और विशाल मंदिर बना हुआ था वहां पर आराम करने की सुविधा काफी बढ़िया लग रही थी पंडित के दोस्त का घर अभी वहां से बहुत दूर था और रात भी होने वाली थी तो पंडित ने धर्मराज से कहा रात होने वाली है। पूरे दिन चलते-चलते थक भी चुके हैं और भूख भी लग रही है तो यहां पर भोजन करके यही पर हम विश्राम कर लेते हैं। फिर सुबह के समय आराम से आगे की यात्रा जारी करेंगे। धर्मराज ने कहा ठीक है मुझे इस गांव में किसी को कुछ जरूरी सामान देने जाना है तुम भोजन करके आराम करो मैं बाद में आकर भोजन कर लूंगा। इतना कहकर वह वहां से चला जाता है लेकिन उसके जाने के कुछ समय बाद कुछ ही देर बाद धुआं उठता हुआ दिखाई देता है और देखते ही देखते पूरे गांव में आग लग जाती है। पंडित ने हैरानी से सोचा कि यह धर्मराज जहां भी जाता है वहां कोई ना कोई अनहोनी जरूर हो जाती है कुछ तो गड़बड़ है इस व्यक्ति में। लेकिन पंडित ने रात्रि में धर्मराज से कुछ भी पूछना उचित नहीं समझा और वे दोनों सो गए सुबह होते ही
दोनों फिर से अपनी यात्रा शुरू कर देते हैं कुछ देर चलने के बाद रास्ते में फिर से एक गांव आता है धर्मराज ने फिर पंडित से कहा आप आगे चलिए मुझे इस गांव में अपने मित्र से मिलने जाना है मैं अपने दोस्त से मिलने के बाद आगे रास्ते में मिलेगा यह कहकर धर्मराज वहां से चला गया लेकिन पंडित इस बार आगे नहीं गया वहीं खड़ा होकर धर्मराज को देखता रहा कि वह कहां जा रहा है और क्या करता है तभी थोड़ी देर बाद लोगों की आवाज सुनाई देने लगी की एक व्यक्ति को सांप ने काट लिया है और उसकी मृत्यु हो गई है। ठीक उसी समय धर्मराज फिर पंडित के पास पहुंच गया। लेकिन इस बार पंडित से रहा नहीं गया और उसने धर्मराज से पूछ ही लिया कि तुम जिस भी गांव में जाते हो वहां कोई ना कोई अनहोनी जरूर हो जाती है क्या तुम मुझे बता सकते हो यह ऐसा क्यों हो रहा है। धर्मराज ने कहा पंडित जी आप तो मुझे बहुत ज्ञानी मालूम पड़े थे इसीलिए मैं आपके साथ चलने लगा था क्योंकि ज्ञानियों का साथ बहुत अच्छा होता है परंतु आप अभी तक समझ नहीं पाए कि मैं कौन हूं। पंडित ने कहा मैं समझ गया हूं लेकिन मुझे कुछ शंका है अगर आप ही अपना उपयुक्त परिचय दे दें तो मेरे लिए आसानी होगी तब धर्मराज ने जवाब दिया कि मैं यमदूत हूं और यमराज की आज्ञा से उन लोगों के प्राण हरण करता हूं जिनकी उम्र पूरी हो चुकी है। हालांकि पंडित को पहले से ही इस बात की आशंका थी फिर भी धर्मराज के मुंह से यह बातें सुनकर वह घबरा गया लेकिन वह हिम्मत करके पूछता है कि अगर तुम सच में यमदूत हो तो मुझे बताओ अगली मृत्यु किसकी है धर्मराज ने जवाब दियाअ। गली मृत्यु तुम्हारे इस मित्र की है जिससे तुम मिलने जा रहे हो और उसकी मृत्यु का कारण भी तुम ही बनोगे। यह बात सुनकर पंडित सहम गया और सोच में पड़ गया कि अगर सच में यह धर्मराज का दूत हुआ तो उसकी बात भी सच होगी और उसके कारण मेरे बचपन के सबसे अच्छे मित्र की मृत्यु हो जाएगी । तो सबसे अच्छा तो यही होगा कि मैं अपने मित्र से मिलने ही ना जाऊं कम से कम मैं उसकी मृत्यु का कारण तो नहीं बनूंगा। धर्मराज ने मुस्कुराते हुए कहा तुम जो सोच रहे हो वह सब मुझे पता है मगर तुम्हारे अपने मित्र से मिलने ना जाने से नियति नहीं बदल जाएगी। तुम्हारे मित्र की मृत्यु तो निश्चित है और वह अगले कुछ ही पलों में घटित होने वाली है। महाकाल के मुंह से ऐसी बातें सुनकर पंडित को झटका लगा क्योंकि महाकाल ने पंडित के मन की बातें पढ़ ली थी। जो की एक सामान्य व्यक्ति के लिए संभव नहीं है अब पंडित को विश्वास हो गया कि यह धर्मराज सचमुच में यमदूत ही है जब पंडित को यह पूर्ण विश्वास हो गया कि धर्मराज जी यमदूत है तो वह घबरा गया वह अपने मित्र की मृत्यु का कारण नहीं बनना चाहता था इसलिए वह पलट कर अपने गांव की तरफ वापस जाने लगा लेकिन जैसे ही पंडित वापस जाने के लिए मोड उसने देखा कि उसका मित्र तेजी से उसकी तरफ चल रहा है जो कि पंडित को देखकर अत्यंत प्रसन्न दिखाई पड़ रहा था अपने मित्र के आने की गति को देखकर पंडित को ऐसा लगा कि जैसे उसका मित्र काफी देर से उसका ही पीछा कर रहा हैलेकिन वह बचपन से ही गंगा था और एक पैर से लंगड़ा भी थाइसीलिए ना तो वह पंडित को आवाज देकर रोक पाया था और ना ही उसे तक पहुंच पा रहा था लेकिन जैसे ही वह पंडित के पास पहुंचा अचानक ही जमीन पर गिर पड़ी और तुरंत ही उसकी मृत्यु हो गई। पंडित हक्का-बक्का होकर धर्मराज की ओर देखनेलगा जैसे कि वह पूछना चाह रहा हो कि आखिर क्या हुआधर्मराज पंडित के मन में उठ रहे प्रश्नों को समझ गया और बोलातुम्हारे मित्र ने पिछले गांव में ही तुम्हें देख लिया थाऔर वह वहीं से ही तुम्हारा पीछा कर रहा था लेकिन गंगा और लंगड़ा होने की वजह से वह तुम तक नहीं पहुंच पाया उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर तुम तक पहुंचाने का प्रयास किया लेकिन बुढ़ापे में बचपन जैसी ताकत नहीं होती इसलिए दिल का दौरा होने के कारण उसकी मृत्यु हो गई क्योंकि वह तुमसे मिलने के लिए अपनी सीमाओं को तोड़कर तुम्हारे पीछे भाग रहा थाइसलिए अपने मित्र की मृत्यु का कारण भी तुम ही कहलाओगे अब पंडित को पूर्णता है या विश्वास हो गया था कि धर्मराज एक यमदूत है और उसका कार्य जीवन के प्राण करना है लेकिन पंडित एक ज्ञानी व्यक्ति था वह यह भी जानता था की मृत्यु पर किसी का वश नहीं है सबको एक न एक दिन मरना ही है यही सोचकर उसने अपने आप को संभाल लिया लेकिन अचानक ही पंडित के मन में अपनी मृत्यु के बारे में जानने की इच्छा हुई इसलिए उसने धर्मराज से पूछा कि जब मृत्यु मेरे दोस्त की होनी थी तो तुम शुरू से ही मेरे साथ क्यों चल रहे थेयह प्रश्न सुनकर धर्मराज जोर से हंस और बोला मैं तो हर पल हर क्षण सभी के साथ चलता हूं किंतु लोग पहचान नहीं पाए क्योंकि लोगों के पास अपनी समस्याओं के अलावा किसी और व्यक्ति वस्तु या घटना के बारे में सोचने समझने या उसे देखने का समय ही नहीं होता पंडित ने कहा तो क्या तुम यह बता सकते हो कि मेरी मृत्यु कब कहां और कैसे होगी महाकाल ने कहा हालांकि किसी भी सामान्य जीव के लिए अपनी मृत्यु के बारे में जानना ठीक नहीं है क्योंकि कोई भी जीव हो या जानकर वह अपनी मृत्यु के बारे में जानकर बहुत दुखी हो जाता हैहालांकि तुम जानी व्यक्ति मालूम पड़ते हो और तुमने जिस तरीके से अपने मित्र की मृत्यु को सहन कर लिया है उसे देखकर लगता है कि तुम अपनी मृत्यु के बारे में जानकर भी दुखी नहीं होंगेमहाकाल ने कहा तो सुनो तुम्हारी मृत्यु आज से ठीक 6 महीने बाद आज ही के दिन किसी दूसरे राज्य में फांसी लगने से होगी और सबसे हैरानी की बात तो यह होगी कि तुम स्वयं ही खुशी से उसे फांसी को स्वीकार कर लोगे इतना कहकर धर्मराज वहां से चला गया क्योंकि अब धर्मराज के पास पंडित के साथ चलते रहने का कोई कारण न था इसके बाद पंडित ने अपने मित्र के शरीर का अंतिम संस्कार किया और यथाशक्ति उसके क्रिया कर्म करके अपने गांव वापस आ गया लेकिन कोई व्यक्ति कितना भी ज्ञानी क्यों ना हो अपनी मृत्यु के बारे में जानकर दुखी तो होता ही हैऔर मृत्यु से बचने का कोई ना कोई उपाय भी खोजना है तो पंडित ने भी वही किया क्योंकि पंडित विद्वान था इसलिए उसकी पहचान उसे राज्य के राजा तक थी पंडित ने सोचा कि राजा के पास तो कई सारे ज्ञानी मंत्री हैं वह मेरी मृत्यु से संबंधित समस्या का कोई ना कोई समाधान निकाल ही लेंगेपंडित यही सब सोता हुआ राज दरबार में पहुंच जाता है और राजा से सारी घटना के बारे में बताता है राजा ने अपने मंत्रियों को सारी समस्या बताई और उनसे सलाह मांगी अंत में सभी ने विचार विमर्श करके कहा अगर पंडित की बात सही है तो उसकी मृत्यु भी 6 महीने बाद ही होगी लेकिन मृत्यु तो तब होगी जब वह किसी दूसरे राज्य में जाएगा यदि वह किसी दूसरे राज्य में जाए ही ना तो मृत्यु ही नहीं होगीमंत्रियों की यह सलाह राजा को भी सही लगी इसके बाद पंडित के रहने की सारी व्यवस्था महल में ही कर दी गई और राजा के आदेश के बिना उसे पंडित से किसी को भी नहीं मिलने दिया जाता था लेकिन पंडित कहानीभी आ जा मंत्रियों की यह सलाह राजा को भी सही लगी इसके बाद पंडित के रहने की सारी व्यवस्था महल में ही कर दी गई और राजा के आदेश के बिना उसे पंडित से किसी को भी नहीं मिलने दिया जाता था लेकिन पंडित कहीं भी आ जा सकता था ताकि पंडित को यह ना लगे कि वह राजा की कैद में है परंतु पंडित डर के मारे स्वयं ही कहीं आता जाता नहीं था धीरे-धीरे महीने गुजरते गए और पंडित की मृत्यु का समय नजदीक आने लगा और अंतत वह भी दिन आ गया जिस दिन पंडित की मृत्यु होनी थी तो जिस दिन पंडित की मृत्यु होनी थी उसकी एक रात पहले पंडित डर के मारे जल्दी ही सो गया ताकि जल्दी से वह रात बीत जाए और अगला दिन आ जाए ताकि उसकी मृत्यु टल सकेयही सोच कर वह जल्दी सो जाता है लेकिन पंडित को नींद में चलने की बीमारी थी और अपनी इस बीमारी के बारे में वह स्वयं ही नहीं जानता था तो फिर राजा मंत्री या किसी वेद को इसके बारे में बताने का कोई प्रश्न ही नहीं उठातापंडित अपनी मृत्यु को लेकर बहुत चिंतित था वह पिछले कई दिनों से ठीक है सो भी नहीं पा रहा था और नींद में चलने की बीमारी भी तभी होती हैजब व्यक्ति ठीक से शो नहीं पा रहा हो तो उसे रात भी पंडित को नींद में चलने का दौरा पड़ावह उठा और महल से निकलकर अस्तबल में गया क्योंकि पंडित राजा का खास मेहमान था इसलिए किसी भी पहरेदार ने उसे नहीं रोका और ना ही किसी तरह की कोई पूछताछ की अस्तबल में पहुंचकर वह सबसे तेज चलने वाले घोड़े की पीठ पर सवार होकर नींद में ही अपने राज्य की सीमा से बाहर दूसरे पड़ोसी राज्य में चला गया इतना ही नहीं वह दूसरे राज्य के राजा के महल में पहुंच गयाउसे महल के पहरेदार ने भी उसे नहीं रोका और ना ही कोई पूछता आज कीसभी लोग रात्रि का अंतिम प्रहार होने के कारण गहरी नींद में थे वह पंडित सीधे राजा के सैन्य कक्षा में पहुंचा जहां राजा और रानी सो रहे थे वह पंडित वहीं जाकर सो गया सुबह हुई तो राजा ने पंडित को रानी के बगल में सोया हुआ देखा तो राजा बहुत क्रोधित हो गया राजा ने पंडित को कैद करने का आदेश दे दियापंडित गिरफ्तार हो गया लेकिन पंडित तो बहुत चक्कर था उसे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर वह दूसरे राज्य में और राजा के सैन्य कक्षा में कैसे पहुंचा लेकिन वहां उसकी यह सब सुनने वाला कोई नहीं थाअगली सुबह राजा ने पंडित को दरबार में पेश करने का आदेश दिया कुछ देर बाद उसे पंडित को दरबार में लाया गया पंडित को देखते ही राजा इतना बबूला हो गया कि उसे फांसी पर चढ़ा देने का हुक्म सुना दिया फांसी की सजा सुनकर पंडित काम किया लेकिन फिर भी थोड़ी सी हिम्मत जताकर राजा से बोला महाराज मैं नहीं जानता कि मैं राजमहल तक कैसे पहुंचा मैं यह भी नहीं जानता हूं कि आपका सैया कक्षा तक में कैसे आया और आपके महल के किसी पहरेदार या सैनिक ने मुझे रोक क्यों नहींलेकिन मैं इतना जरुर जानता हूं कि आज मेरी मृत्यु होनी थी और वह होनी भी जा रही हैराजा को यह बात थोड़ी अजीब लगीउसने पंडित से पूछा तुम्हें कैसे पता कि आज तुम्हारी मृत्यु होनी हैराजा के इस प्रश्न के जवाब में पंडित ने पिछले 6 महीने का सारा वाकया राजा को सुना दिया और बोलामहाराज मेरा क्या किसी भी सामान्य व्यक्ति में इतना साहस नहीं कि वह राजा के सैन्य कक्षा में राजा की उपस्थिति में रानी के साथ सो जाएराजा को पंडित की बात में थोड़ा तर्क दिखाई पड़ा परंतु उसने सोचा कि यह मृत्यु से बचने के लिए धर्मराज और उसके द्वारा अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी की कहानी बन रहा है इसलिए राजा ने पंडित से कहा यदि तुम्हारी बात सत्य है और आज यह तुम्हारी मृत्यु का दिन है जैसा कि हम धर्मराज ने तुमसे कहा था तो आज तुम्हारी मृत्यु का कारण मैं नहीं बनूंगा लेकिन यदि तुम्हारी बात झूठी निकली तो निश्चित ही आज तुम्हारी मृत्यु का दिन होगा ना क्योंकि जिस राज्य से पंडित आया था उसे राज्य का राजा इस राजा का मित्र था इसलिए इस राजा ने तुरंत अपने दो सैनिकों को पड़ोसी राजा के पास भेज कर पंडित की बात की सत्यता का प्रमाण मांगा भेजो भेजे गए सैनिक शाम तक लौटे और उन्होंने राजा कोबताया कि महाराज पंडित जो कुछ भी कह रहा है वह सब सत्य है पड़ोसी राज्य के राजा ने पिछले 6 महीने से पंडित के रहने की सारी व्यवस्था अपने ही महल में कर रखी थी पंडित राजा का खास मेहमान थाकल शाम राजा आखिरी बार पंडित से उसके कक्षा में मिले थे और उसके बाद यह इस राज्य में कैसे पहुंच गया इसकी जानकारी किसी को भी नहीं है इसलिए उसे राज्य के राजा के अनुसार पंडित को फांसी की सजा देना ठीक नहीं है लेकिन राजा के सामने एक नई समस्या थी क्योंकि उसने बिना पूरी बात जान ही पंडित को फांसी की सजा सुना दी थी इसलिए अगर पंडित को फांसी नहीं दी जाती तो राजा के वचन का अपमान हो जाएगा लेकिन अगर राजा की बात का मान रखा जाए तो बेवजा है ही एक निर्दोष व्यक्ति की मौत हो जाएगी राजा ने अपने सभी मंत्रियों से इस बारे में सुझाव मांगा तो मंत्रियों ने राजा को सुझाव दिया कि महाराज पंडित को एक कच्ची सूट के धागे से फांसी लगवा दी जाए इससे आपकी कथन काभी मन रह जाएगा और कच्चे सूट के धागे से पंडित को फांसी भी नहीं लगेगी और उसके प्राण भी बच जाएंगे राजा को मंत्रियों का यह सुझाव पसंद आया और उसने ऐसा ही करने का आदेश दे दियापंडित के लिए कच्चे सूट के धागे से फांसी का फंदा बनाया गया और नियम के अनुसार पंडित को फांसी पर चढ़ाए जाने लगा सभी लोग बहुत खुश थे कि ना तो पंडित मारेगा और ना ही राजा का वचन खाली जाएगा पंडित को भी पूर्ण विश्वास था यह शोध के धागे से तो उसकी मृत्यु हो ही नहीं सकती पंडित उसे पर चढ़ने के लिए तैयार हो गया जैसा कि धर्मराज ने भविष्यवाणी की थी कि तुम खुद ही अपनी फांसी को स्वीकार करोगे लेकिन जैसे ही पंडित को फांसी दी गई सूट का धागा तो टूट गया लेकिन टूटने से पहले उसने अपना काम कर दिया था पंडित के गले की एक नस सूट के धागे के झटके से कट चुकी थीऔर पंडित जमीन पर पड़ा तड़प रहा थाउसे पाल उसके गले से खून की फुहार निकल रही थी और देखते ही देखते पंडित का शरीर पूरी तरह से शांत हो गयासभी लोग आश्चर्यचकित थे और पंडित को मारता हुआ देख रहे थे किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि कच्चे सूट के धागे से भी किसी इंसान की मृत्यु हो सकती हैलेकिन घटना तो घट चुकी थी नियति ने अपना काम कर दिया थाऔर धर्मराज की भविष्यवाणी सच हो चुकी थीदोस्तों श्रीमद् भागवत गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है जो होना होता है वह होकर ही रहता है हम चाहे कितनी ही सावधानी बढ़ाते कितना ही उपाय कर ले लेकिन घटना और घटना की पूरी प्रणाली पहले से ही तय होती है जिससे हम थोड़ा सा भी इधर-उधर नहीं कर सकते हैं दोस्तों शायद इसीलिए ईश्वर ने हमें भविष्य जानने की क्षमता नहीं दी है ताकि हम अपने जीवन को ज्यादा बेहतर तरीके से जी सके और यही बात उसे पंडित पर भी लागू होती है अगर पंडित ने महाकाल से अपनी मृत्यु के बारे में न पूछा होता तो 6 महीने तक राजा के महल में कैद रहकर डर-डर कर जीने की बजाय ज्यादा बेहतर जीवन जीता दोस्तों
दोस्तों शायद इसीलिए ईश्वर ने हमें भविष्य जानने की क्षमता नहीं दी है ताकि हम अपने जीवन को ज्यादा बेहतर तरीके से जी सके और यही बात उसे पंडित पर भी लागू होती है अगर पंडित ने महाकाल से अपनी मृत्यु के बारे में न पूछा होता तो 6 महीने तक राजा के महल में कैद रहकर डर-डर कर जीने की वजह ज्यादा बेहतर जीवन जीता दोस्तों आपने आज के इस वीडियो से क्या सीखा हुआ मुझे आप कमेंट में बता सकते हैं इसी के साथ में उम्मीद है कि आपको आज की वीडियो पसंद आई होगी तो इस वीडियो को उसे इंसान को शेयर करें जिससे यह कहानी सुनाने की जरूरत है और उसी के ठीक बात चैनल को सब्सक्राइब करेंतो चलिए फिर मिलते हैं ऐसी एक और नई वीडियो में एक नए मैसेज के साथ तब तक के लिए अपना ख्याल रखें धन्यवाद और नमो बुद्धायहरे कृष्णा हरे कृष्णा

 

Also read:मात्र 21दिन, गाय को गुङ और रोटी देने से क्या होता है ? Cow Ko Gudd Aur Roti Dene se kya hota hai

Also read:आज लोग कर्ज में क्यों डूबते जा रहे हैं, जानिए क्या है असली वजह और आप कैसे बच सकते हैं Why are people drowning in debt

Also read:स्वास्थ्य के लिए सब्जियों का महत्व: सब्जियां स्वास्थ्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं और उनमें कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं Importance of vegetables for health

Also read:गर्मी में दस्त लगने पर क्या करें जानिए पांच घरेलु उपाय What to do if you have diarrhea in summer

About Post Author

Anjana Kashyap

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %